जीवन में जल्दी सफल होना है तो तुरंत इस एक बात की गांठ बांध लो
स्वामी विवेकानंद भारत के महान संतों में से एक रहे हैं। उन्होने कम उम्र में ही न सिर्फ ज्ञान अर्जित कर लिया बल्कि अपने ज्ञान के प्रकाश से अनेकों लोगों का भला भी किया। ऐसी हीं एक घटना उनके साथ हुई थी जिसे हम यहाँ बताने जा रहे हैं।
एक बार स्वामी विवेकानंद अपने आश्रम में बैठे हुए थे। तभी एक व्यक्ति उनके पास आया और उनके पैर पकड़ लिया। उस व्यक्ति ने स्वामी जी से कहा कि मै बहुत पढा-लिखा हूँ और बहुत मे
हनत भी करता हूँ लेकिन फिर भी मुझे मनवांछित सफलता नही मिलती है। आखिर क्यों मेरी किस्मत इतनी खराब है।
स्वामी जी ने उस व्यक्ति को देख कर कुछ सोचा और कहा कि मैं तुम्हारे सवालों का जवाब दूँगा लेकिन उससे पहले तुम्हे मेरा एक काम करना होगा। वो व्यक्ति मान गया। तब स्वामी विवेकानंद ने कहा कि मेरे कुत्ते को थोड़ी दूर ले जाकर टहला लाओ फिर मैं तुम्हारे सवालों के जवाब दूँगा। वह व्यक्ति उनके कुत्ते को लेकर वहाँ से चला गया।
कुछ देर बाद वो व्यक्ति, कुत्ते को लेकर वापस आया तो स्वामी जी ने देखा कि उनका कुत्ता हांफ रहा था जबकि उस व्यक्ति के चेहरे पर थकान का नामोनिशान तक नहीं था। जब स्वामी जी ने इसका कारण पूछा तो उसने बताया कि कुत्ता राह चलते हुए किसी भी गली में घुस जा रहा था और वहाँ के कुत्तों से लड़-झगड़कर मेरे पास वापस आ जा रहा था।
हम दोनों ने एक हीं बराबर दूरी तय की लेकिन आपका कुत्ता, दूसरे कुत्तों के पीछे ज्यादा लगा रहा इसलिए वो थक गया और मैं अभी तक ऊर्जावान हूँ। उसकी बात सुनकर स्वामी जी ने कहा कि यही तुम्हारे सवालों का जवाब है। तुम मेहनती हो लेकिन तुम्हारी प्रवृति इस कुत्ते जैसी है। तुम अपना काम करने से ज्यादा दूसरे के कामों में ज्यादा दखल देते हो, यही कारण है कि तुम आगे नहीं बढ पा रहे।
इसलिए अब से सिर्फ अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करना और बेकार के लोगों से उलझने से बचो। फिर सफलता तुम्हारे कदमों में होगी। देखा जाए तो स्वामी जी की बात सही है। अगर हम लोग अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित कर के अपना काम करें तो सफलता पाने से हमें कोई नहीं रोक सकता है।
स्वामी विवेकानंद भारत के महान संतों में से एक रहे हैं। उन्होने कम उम्र में ही न सिर्फ ज्ञान अर्जित कर लिया बल्कि अपने ज्ञान के प्रकाश से अनेकों लोगों का भला भी किया। ऐसी हीं एक घटना उनके साथ हुई थी जिसे हम यहाँ बताने जा रहे हैं।
एक बार स्वामी विवेकानंद अपने आश्रम में बैठे हुए थे। तभी एक व्यक्ति उनके पास आया और उनके पैर पकड़ लिया। उस व्यक्ति ने स्वामी जी से कहा कि मै बहुत पढा-लिखा हूँ और बहुत मे
हनत भी करता हूँ लेकिन फिर भी मुझे मनवांछित सफलता नही मिलती है। आखिर क्यों मेरी किस्मत इतनी खराब है।
स्वामी जी ने उस व्यक्ति को देख कर कुछ सोचा और कहा कि मैं तुम्हारे सवालों का जवाब दूँगा लेकिन उससे पहले तुम्हे मेरा एक काम करना होगा। वो व्यक्ति मान गया। तब स्वामी विवेकानंद ने कहा कि मेरे कुत्ते को थोड़ी दूर ले जाकर टहला लाओ फिर मैं तुम्हारे सवालों के जवाब दूँगा। वह व्यक्ति उनके कुत्ते को लेकर वहाँ से चला गया।
कुछ देर बाद वो व्यक्ति, कुत्ते को लेकर वापस आया तो स्वामी जी ने देखा कि उनका कुत्ता हांफ रहा था जबकि उस व्यक्ति के चेहरे पर थकान का नामोनिशान तक नहीं था। जब स्वामी जी ने इसका कारण पूछा तो उसने बताया कि कुत्ता राह चलते हुए किसी भी गली में घुस जा रहा था और वहाँ के कुत्तों से लड़-झगड़कर मेरे पास वापस आ जा रहा था।
हम दोनों ने एक हीं बराबर दूरी तय की लेकिन आपका कुत्ता, दूसरे कुत्तों के पीछे ज्यादा लगा रहा इसलिए वो थक गया और मैं अभी तक ऊर्जावान हूँ। उसकी बात सुनकर स्वामी जी ने कहा कि यही तुम्हारे सवालों का जवाब है। तुम मेहनती हो लेकिन तुम्हारी प्रवृति इस कुत्ते जैसी है। तुम अपना काम करने से ज्यादा दूसरे के कामों में ज्यादा दखल देते हो, यही कारण है कि तुम आगे नहीं बढ पा रहे।
इसलिए अब से सिर्फ अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करना और बेकार के लोगों से उलझने से बचो। फिर सफलता तुम्हारे कदमों में होगी। देखा जाए तो स्वामी जी की बात सही है। अगर हम लोग अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित कर के अपना काम करें तो सफलता पाने से हमें कोई नहीं रोक सकता है।
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