एंड्रॉयड एप्स के बग तलाश करों 1000 डाॅलर का
एंड्रॉयड एप्स की सिक्योरिटी के लिए गूगल ने शुरु किया बग बाउंटी प्रोग्राम
गूगल ने बग बाउंटी प्रोग्राम की शुरुआत की है। एंड्रॉयड एप्स को पहले से ज्यादा सिक्योर करने के लिहाज से इस प्रोग्राम की शुरूआत
की गयी है। गूगल द्वारा हैकर्स या सिक्योरिटी रिसर्चर्स को मौका दिया जा रहा है कि वे गूगल प्ले स्टोर में खामी ढूंढ कर गूगल को बताएं। गूगल ने ऐसा अपने कुछ मुख्य एंड्रॉयड ऐप्स के लिए किया है।
गूगल ने बग बाउंटी प्रोग्राम का नाम गूगल प्ले सिक्योरिटी रिवॉर्ड रखा है। इसके अन्र्तगत हैकर्स और सिक्योरिटी रिसर्चर्स एंड्रॉयड एप्स के डेवेलेपर्स के साथ बग ढूंढने और उसे ठीक करने का काम करेंगे। गूगल ने इसके लिए 1,000 डॉलर की इनामी राशी तय की है।
गूगल के अनुसार, इस प्रोग्राम का मकसद एप् की सिक्योरिटी बढ़ाना है जो डेवेलपर्स के लिए फायदेमंद साबित होगी। इतना ही नहीं यह एंड्रॉयड यूजर्स और पूरे गूगल प्ले इकोसिस्टम के लिए फायदेमंद होगा।
गौरतलब है कि गूगल ने इसके लिए बग बाउंटी प्लेटफॉर्म हैकरवन के साथ पार्टर्नशिप की है जो इस प्रोग्राम को मैनेज करेगा। आपको बता दें कि हैकरवन एक प्लेटफॉर्म है। जो बिजनेस और साइबर सिक्योरिटी रिसर्चर्स के बीच की कड़ी का काम करता है और यह इस तरह की सबसे बड़ा साइबर सिक्योरिटी प्लेटफॉर्म है।
इस प्लेटफॉर्म के तहत हैकर्स गूगल को एप में मिली खामियों के बारे में रिपोर्ट कर सकेंगे जिसे उनके साथ ही मिलकर फिक्स किया जाएगा। इस बग बाउंटी के तहत जो भी हैकर या सिक्योरिटी रिसर्चर रिपोर्ट करना चाहते हैं वे सीधे ऐप डेवेलपर को रिपोर्ट कर सकते हैं। एक बार खामी ठीक हो गई इसके बाद हैकर्स को बग रिपोर्ट हैकरवन के साथ शेयर करनी होगी. यह सब प्रक्रिया पूरी होने के बाद गूगल पैसा देगा। पैसे देने से पहले कंपनी एप की खामी की गंभीरता को देखंेगी। फिलहाल इस बारे में कंपनी ने डीटेल जानकारी अभी जारी नहीं की है।
बग बाउंटी के बारे में आपको जानकारी नहीं है तो बता दें कि दुनिया भर की बड़ी टेक कंपनियां जैसे फेसबुक और गूगल बग बाउंटी प्रोग्राम चलाती हैं। इसके तहत कुछ खामियों के बारे में पता लगाकर कंपनी को बताया जाता है जिसके बाद कंपनी रिवॉर्ड देती है। फेसबुक बग बाउंटी प्रोग्राम में भारतीय हैकर्स सबसे आगे हैं और उन्होंने फेसबुक की तरफ से करोड़ों रुपये बतौर इनाम जीते हैं। आप भी गूगल के बाउंटी प्रोग्राम में शामिल होकर लाखों का इनाम जीत सकते हैं। (स्त्रोत गूगल ट्रेंड)
यह लेख पत्रकारिता सामग्री नहीं है। इसे वीमीडिया लेखक द्वारा कॉपीराइट किया गया है और किसी भी तरह से यह UC News के विचारों को नहीं दर्शाता है।
0 डिसलाइक
बचपन से ही लेखन के प्रति लगाव, उसी समय से रचनाओं का प्रकाशन भी शुरू उस वक्त से निरन्तर लेखन, समझे लिखने का जुनून, विषय की सीमा नहीं।
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गूगल ने बग बाउंटी प्रोग्राम का नाम गूगल प्ले सिक्योरिटी रिवॉर्ड रखा है। इसके अन्र्तगत हैकर्स और सिक्योरिटी रिसर्चर्स एंड्रॉयड एप्स के डेवेलेपर्स के साथ बग ढूंढने और उसे ठीक करने का काम करेंगे। गूगल ने इसके लिए 1,000 डॉलर की इनामी राशी तय की है।
गूगल के अनुसार, इस प्रोग्राम का मकसद एप् की सिक्योरिटी बढ़ाना है जो डेवेलपर्स के लिए फायदेमंद साबित होगी। इतना ही नहीं यह एंड्रॉयड यूजर्स और पूरे गूगल प्ले इकोसिस्टम के लिए फायदेमंद होगा।
गौरतलब है कि गूगल ने इसके लिए बग बाउंटी प्लेटफॉर्म हैकरवन के साथ पार्टर्नशिप की है जो इस प्रोग्राम को मैनेज करेगा। आपको बता दें कि हैकरवन एक प्लेटफॉर्म है। जो बिजनेस और साइबर सिक्योरिटी रिसर्चर्स के बीच की कड़ी का काम करता है और यह इस तरह की सबसे बड़ा साइबर सिक्योरिटी प्लेटफॉर्म है।
इस प्लेटफॉर्म के तहत हैकर्स गूगल को एप में मिली खामियों के बारे में रिपोर्ट कर सकेंगे जिसे उनके साथ ही मिलकर फिक्स किया जाएगा। इस बग बाउंटी के तहत जो भी हैकर या सिक्योरिटी रिसर्चर रिपोर्ट करना चाहते हैं वे सीधे ऐप डेवेलपर को रिपोर्ट कर सकते हैं। एक बार खामी ठीक हो गई इसके बाद हैकर्स को बग रिपोर्ट हैकरवन के साथ शेयर करनी होगी. यह सब प्रक्रिया पूरी होने के बाद गूगल पैसा देगा। पैसे देने से पहले कंपनी एप की खामी की गंभीरता को देखंेगी। फिलहाल इस बारे में कंपनी ने डीटेल जानकारी अभी जारी नहीं की है।
बग बाउंटी के बारे में आपको जानकारी नहीं है तो बता दें कि दुनिया भर की बड़ी टेक कंपनियां जैसे फेसबुक और गूगल बग बाउंटी प्रोग्राम चलाती हैं। इसके तहत कुछ खामियों के बारे में पता लगाकर कंपनी को बताया जाता है जिसके बाद कंपनी रिवॉर्ड देती है। फेसबुक बग बाउंटी प्रोग्राम में भारतीय हैकर्स सबसे आगे हैं और उन्होंने फेसबुक की तरफ से करोड़ों रुपये बतौर इनाम जीते हैं। आप भी गूगल के बाउंटी प्रोग्राम में शामिल होकर लाखों का इनाम जीत सकते हैं। (स्त्रोत गूगल ट्रेंड)
यह लेख पत्रकारिता सामग्री नहीं है। इसे वीमीडिया लेखक द्वारा कॉपीराइट किया गया है और किसी भी तरह से यह UC News के विचारों को नहीं दर्शाता है।
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