जीवन में जब भी हो किसी भी कारण निराशा, याद कर लें ये
1. किस्सा
एक बार शहर में सर्कस का खेल चल रहा था, जिसमे एक महावत हाथी को एक पतली सी डोरी से बांधकर चारों और घुमा रहा था। यह दृश्य देखकर सभी आश्चर्यचकित थे कि इतना बड़ा हाथी एक पतली सी डोरी से कैसे बंधा रह सकता हैं। जब
कि यह डोरी तो एक छोटा सा बच्चा भी एक झटके में तोड़ सकता हैं। खेल खत्म हो गया और सभी अपने-अपने घर जा रहे थे। एक व्यक्ति वहां अभी भी खड़ा उस हाथी को देख रहा था। वह बार-बार उसी हाथी के बारे में सोच रहा था। जब उसे कोई जवाब नहीं मिला तो उसने उस महावत से पूछा कि आखिर इतना बड़ा हाथी एक छोटी सी डोरी से कैसे बंधा रह सकता हैं।
तब महावत नें जवाब दिया। हम जंगल से हाथी का बच्चा लेकर आते हैं और उसे जंजीरों से बांधकर रखते हैं। हाथी का बच्चा बार बार इन जंजीरों को तोड़ने का प्रयास करता हैं, लेकिन वो सफल नहीं हो पाता हैं। हाथी का बच्चा पूरी तरह निराश हो जाता हैं। वो यह समझता है कि उसमे इतनी शक्ति नहीं हैं की वह इन जंजीरों को तोड़ सके। इसके बाद हाथी का बच्चा पूरी तरह निराश हो जाता हैं। फिर जब हाथी का बच्चा बड़ा हो जाता हैं तो उसे एक ऐसी जगह ले जाया जाता हैं।
जहां बड़े-बड़े हाथी पतली-पतली डोरियों से बंधे होते है और उसे भी एक पतली डोरी से बांध दिया जाता हैं। हाथी यह सोचकर उस डोरी को तोड़ने का प्रयास नहीं करता कि बाकी सभी हाथी भी इसी तरह से बंधे हैं। जब बाकी हाथी इसे नहीं तोड़ सकते तो मैं कैसे तोड़ सकता हूं। यह सोचकर हाथी हमेशा उस पतली डोरी से बंधा रहता है जिसे वह कभी भी तोड़ सकता हैं। वह व्यक्ति यह सब सुनकर काफी आश्चर्यचकित हुआ।
सीख:निराशा में कई बार अपनी ताकत का एहसास भी गुम हो जाता है। ऐसे में सिर्फ सकारात्मक साेच और खुद पर विश्वास ही दो ऐसी कुंजियां है, जिनके द्वारा विपरीत परिस्थितियों से बाहर आया जा सकता है
1. किस्सा
एक बार शहर में सर्कस का खेल चल रहा था, जिसमे एक महावत हाथी को एक पतली सी डोरी से बांधकर चारों और घुमा रहा था। यह दृश्य देखकर सभी आश्चर्यचकित थे कि इतना बड़ा हाथी एक पतली सी डोरी से कैसे बंधा रह सकता हैं। जब
कि यह डोरी तो एक छोटा सा बच्चा भी एक झटके में तोड़ सकता हैं। खेल खत्म हो गया और सभी अपने-अपने घर जा रहे थे। एक व्यक्ति वहां अभी भी खड़ा उस हाथी को देख रहा था। वह बार-बार उसी हाथी के बारे में सोच रहा था। जब उसे कोई जवाब नहीं मिला तो उसने उस महावत से पूछा कि आखिर इतना बड़ा हाथी एक छोटी सी डोरी से कैसे बंधा रह सकता हैं।
तब महावत नें जवाब दिया। हम जंगल से हाथी का बच्चा लेकर आते हैं और उसे जंजीरों से बांधकर रखते हैं। हाथी का बच्चा बार बार इन जंजीरों को तोड़ने का प्रयास करता हैं, लेकिन वो सफल नहीं हो पाता हैं। हाथी का बच्चा पूरी तरह निराश हो जाता हैं। वो यह समझता है कि उसमे इतनी शक्ति नहीं हैं की वह इन जंजीरों को तोड़ सके। इसके बाद हाथी का बच्चा पूरी तरह निराश हो जाता हैं। फिर जब हाथी का बच्चा बड़ा हो जाता हैं तो उसे एक ऐसी जगह ले जाया जाता हैं।
जहां बड़े-बड़े हाथी पतली-पतली डोरियों से बंधे होते है और उसे भी एक पतली डोरी से बांध दिया जाता हैं। हाथी यह सोचकर उस डोरी को तोड़ने का प्रयास नहीं करता कि बाकी सभी हाथी भी इसी तरह से बंधे हैं। जब बाकी हाथी इसे नहीं तोड़ सकते तो मैं कैसे तोड़ सकता हूं। यह सोचकर हाथी हमेशा उस पतली डोरी से बंधा रहता है जिसे वह कभी भी तोड़ सकता हैं। वह व्यक्ति यह सब सुनकर काफी आश्चर्यचकित हुआ।
सीख:निराशा में कई बार अपनी ताकत का एहसास भी गुम हो जाता है। ऐसे में सिर्फ सकारात्मक साेच और खुद पर विश्वास ही दो ऐसी कुंजियां है, जिनके द्वारा विपरीत परिस्थितियों से बाहर आया जा सकता है
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