
गणना करने वाले यंत्र को संगणक अथवा कम्प्यूटर कहते हैं। आरंभिक वर्षों में कम्प्यूटर का उपयोग मूलतः गणनात्मक कार्यों के लिए ही हुआ, परंतु आज इसका प्रयोग-क्षेत्र बहुत ही व्यापक और विस्तृत हो गया है। लगभग एक शताब्दी के गहन अनुसंधान के बाद वर्ष 1937 में ‘‘मार्क-1’’ नाम के कम्प्यूटर का निर्माण किय जा सका। भारत में कम्प्यूटर का विकास 1955 में शुरू हुआ, परंतु राजीव गांधी के प्रधानमंत्रि काल में 1984 में जाकर ही इस प्रौद्योगिकी को प्रयाप्त महत्व मिला। कंम्पयूटर प्रौद्योगिकी आरंभिक वर्षों में पूर्णरूपेण आयात पर ही आश्रित थी, परंतु वर्ष 1998 की शुरूआत में भारत ने सुपर कम्प्यूटर परम-10000 का विकास कर सम्पूर्ण विश्व को आश्चर्यचकित कर दिया। अपने आविष्कार के बाद के मात्र 60 वर्षों के अंतराल में सम्पूर्ण विश्व व्यक्तिगत कम्प्यूटर के युग में प्रविष्ट हो चुका है। इस कम्प्यूटर के विकास के बाद विश्व के प्रमुख पांच कम्प्यूटर शक्तियों में गिना जाने लगा है।
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